New president and vice president of india details and president election process in hindi
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Source:- google.com
तो चलिए शुरू करते है,
तो आप सब जानते ही है भारत के 13 president of india श्री रामनाथ कोविन्दजी का कार्यकाल समाप्त हो गया है और जुलाई 2022में भारत के राष्ट्रपति(President of india) और उपराष्ट्रपती(vice president of india) के चुनाव(election) हुए है तो सबसे पहले आप को बताते है कि उपराष्ट्रपति(vice president of india) का चुनाव कैसे होता है और कौन है भारत के नये राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति (Who is the new President and Vice President of India).
Who are the 15th Presidents of India?भारत के 15वे राष्ट्रपति के रूपमे किसने शपथ लिया है?
उप राष्ट्रपति से पहले चलिए आपको बताते है कि हाल ही में हुए राष्ट्रपति के चुनाव में NDA के उम्मीदवार श्रीमती द्रौपदी मुर्मूजी (draupadi murmu) और UPA के उम्मीदवार श्री यशवंत सिन्हाजी (yashvant sinha) दोनो आमने सामने थे जिसमें NDA के उम्मीदवार श्री द्रौपदी मुर्मू जी ने UPA के उम्मीदवार श्री यशवंत सिन्हाजी को 2,96,626 जितने मतदानोसे(votes) मात देकर भारत के 15वे राष्ट्रपति (17th president of india) के रूप में शपथ लिया है ।।
Q. भारत के 15वे राष्ट्रपति कौन है ?
ANS:- श्रीमती द्रौपदी मुर्मू (NDA)
Who can be Vice President?(कौन बन सकता है उपराष्ट्रपति)
1.उपराष्ट्रपति बनने के लिए एक व्यक्ति में इन बातों का होना जरूरी है
उसे भारत का नागरिक होना चाहिए।
उसे भारत का नागरिक होना चाहिए।
2.उसकी आयु 35 साल से कम नहीं होना चाहिए।
3.वह राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित होने के योग्य हो।
ऐसा व्यक्ति भारत का उपराष्ट्रपति नहीं बन सकता जिसके पास केंद्र या राज्य सरकार या उसके अधीन किसी निकाय में लाभ का कोई पद हो।
How is the Vice President of India elected?(भारत मे उप राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है?)
उपराष्ट्रपति का चुनाव निर्वाचक मंडल यानी इलेक्टोरल कॉलेज करता है। इस पद पर चुना गया व्यक्ति जनप्रतिनिधियों की पसंद होता है।
संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्य (निर्वाचित और मनोनित) एकल संक्रमणीय मत द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के आधार पर मतदान के माध्यम से करते हैं। यह मत गोपनीय होता है। राष्ट्रपति चुनाव के विपरित राज्य विधानमंडल के सदस्य इसमें भाग नहीं लेते हैं।
संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्य (निर्वाचित और मनोनित) एकल संक्रमणीय मत द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के आधार पर मतदान के माध्यम से करते हैं। यह मत गोपनीय होता है। राष्ट्रपति चुनाव के विपरित राज्य विधानमंडल के सदस्य इसमें भाग नहीं लेते हैं।
20-20 मतदाताओका समर्थन (Support of 20-20 voters)
उपराष्ट्रपति पद के लिए अभ्यर्थी का नाम मंडल के 20 -20 मतदाताओं के द्वारा समर्थित और प्रस्तावित होना जरूरी है,इसके साथ ही प्रत्याशी को 15,000 रुपए की जमानत राशि भी जमा करानी होती है। यदि प्रत्याशी चाहे तो तय तिथि से पहले चुनाव अधिकारी को लिखित में देकर अपना नाम वापस ले सकता है
कैसे होती है वोटों की गिनती (how votes are counted)
राष्ट्रपति चुनाव की तरह ही उपराष्ट्रपति चुनाव में सबसे ज्यादा वोट हासिल करने से ही जीत तय नहीं होती। उपराष्ट्रपति वही बनता है, जो वोटरों के वोटों के कुल वेटेज का आधे से अधिक हिस्सा हासिल करे।
पहली पसंद का महत्व : सबसे पहले का मतलब समझने के लिए वोट काउंटिंग में प्राथमिकता पर गौर करना होगा। सांसद वोट देते वक्त अपने मतपत्र पर ही क्रमानुसार अपनी पसंद के उम्मीदवार बता देते हैं।
सबसे पहले सभी मतपत्रों पर दर्ज पहली वरीयता के मत गिने जाते हैं। यदि इस पहली गिनती में ही कोई उम्मीदवार जीत के लिए जरूरी वेटेज का कोटा हासिल कर ले तो उसकी जीत हो गई लेकिन अगर ऐसा न हो सका तो फिर प्राथमिकता के आधार पर वोट गिने जाते हैं।
पहले उस उम्मीदवार को बाहर किया जाता है, जिसे पहली गिनती में सबसे कम वोट मिले, लेकिन उसे प्राप्त वोटों से यह देखा जाता है कि उसकी दूसरी पसंद के कितने वोट किस उम्मीदवार को मिले हैं।
कैसे होते हैं उम्मीदवार बाहर : दूसरी वरीयता के वोट ट्रांसफर होने के बाद सबसे कम वोट वाले उम्मीदवार को बाहर करने की नौबत आने पर अगर दो उम्मीदवारों को सबसे कम वोट मिले हों, तो बाहर उसे किया जाता है, जिसके पहली प्राथमिकता वाले वोट कम हों।
कौन बना रहता है दौड़ में : अगर अंत तक किसी को तय कोटा न मिले तो भी इस सिलसिले में उम्मीदवार बारी-बारी से बाहर होते रहते हैं और आखिर में जिसे भी सबसे अधिक वोट मिलते हैं वही विजयी होगा।
संविधान के अनुच्छेद 71 के अनुसार उपराष्ट्रपति के निर्वाचन संबंधी सभी शंकाओं और विवादों का निपटारा उच्चतम न्यायालय द्वारा किया जाएगा। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति निर्वाचन अधिनियम, 1952 की धारा 14 के अनुसार एक निर्वाचन अर्जी उच्चतम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जा सकती है।
पहली पसंद का महत्व : सबसे पहले का मतलब समझने के लिए वोट काउंटिंग में प्राथमिकता पर गौर करना होगा। सांसद वोट देते वक्त अपने मतपत्र पर ही क्रमानुसार अपनी पसंद के उम्मीदवार बता देते हैं।
सबसे पहले सभी मतपत्रों पर दर्ज पहली वरीयता के मत गिने जाते हैं। यदि इस पहली गिनती में ही कोई उम्मीदवार जीत के लिए जरूरी वेटेज का कोटा हासिल कर ले तो उसकी जीत हो गई लेकिन अगर ऐसा न हो सका तो फिर प्राथमिकता के आधार पर वोट गिने जाते हैं।
पहले उस उम्मीदवार को बाहर किया जाता है, जिसे पहली गिनती में सबसे कम वोट मिले, लेकिन उसे प्राप्त वोटों से यह देखा जाता है कि उसकी दूसरी पसंद के कितने वोट किस उम्मीदवार को मिले हैं।
कैसे होते हैं उम्मीदवार बाहर : दूसरी वरीयता के वोट ट्रांसफर होने के बाद सबसे कम वोट वाले उम्मीदवार को बाहर करने की नौबत आने पर अगर दो उम्मीदवारों को सबसे कम वोट मिले हों, तो बाहर उसे किया जाता है, जिसके पहली प्राथमिकता वाले वोट कम हों।
कौन बना रहता है दौड़ में : अगर अंत तक किसी को तय कोटा न मिले तो भी इस सिलसिले में उम्मीदवार बारी-बारी से बाहर होते रहते हैं और आखिर में जिसे भी सबसे अधिक वोट मिलते हैं वही विजयी होगा।
संविधान के अनुच्छेद 71 के अनुसार उपराष्ट्रपति के निर्वाचन संबंधी सभी शंकाओं और विवादों का निपटारा उच्चतम न्यायालय द्वारा किया जाएगा। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति निर्वाचन अधिनियम, 1952 की धारा 14 के अनुसार एक निर्वाचन अर्जी उच्चतम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जा सकती है।
उपराष्ट्रपति का कार्यकाल (Vice President's term)
उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पांच वर्ष रहता है। यदि पूर्व उपराष्ट्रपति द्वारा कार्यकाल समाप्त होने की वजह से नए उपराष्ट्रपति का चुनाव किया जा रहा हो तो उसका कार्यकाल निधार्रित अवधि पर समाप्त हो जाएगा। यदि मौत, इस्तीफे, बर्खास्तगी या किसी अन्य वजह से यह पद रिक्त होता है तो जल्द ही नया उपराष्ट्रपति चुन लिया जाएगा। चयनित व्यक्ति का कार्यकाल शपथ ग्रहण की तिथि से पांच दिन का होगा।
कौन नही बन सकता उपराष्ट्रपति (Who can't become Vice President)
उपराष्ट्रपति न तो संसद सदस्य होता है न ही वह किसी भी विधानसभा का सदस्य होता है। यदि कोई सांसद या विधायक उपराष्ट्रपति बन भी जाता है तो उसे पद ग्रहण करने से पहले अपना पद छोड़ना होता है। वह राज्यसभा का पदेन सदस्य होता है।
कितना महत्वपूर्ण संवैधानिक पद होता है ये (How important is this constitutional post?)
भारत में राष्ट्रपति के बाद उपराष्ट्रपति का पद कार्यकारिणी में दूसरा सबसे बड़ा पद होता है। वह संसद के उच्च सदन राज्यसभा का अध्यक्ष भी होता है। इस पद की गरीमा इस बात से भी समझी जा सकती है कि देश में अब तक हुए 11 उपराष्ट्रपतियों में से 6 बाद में राष्ट्रपति भी बने हैं। किसी भी कारण से राष्ट्रपति पद रिक्त होने की स्थिति में वह कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में भी कार्य करता है। उस स्थिति में वह ऐसी उपलब्धियों, भत्तों और विशेषाधिकारों का हकदार होता है, जिनका हकदार राष्ट्रपति होता है।
तो चलिए जानते है कि
भारत के 2022 के उपराष्ट्रपति चुनावमे किसने मेरी है बाजी
कौन है भारतके 14वे उपराष्ट्रपति (Who is the 14th vice President of India)
तो आपको बताते है कि 2022 के उपराष्ट्रपति(2022 vice president election) के चुनावमें NDA की तरफ से उम्मीदव थे श्रीजगदीप धनखड़ और विपक्ष यानी UPA के उम्मीदवार थी श्रीमती मार्ग्रेट अल्वा और इस चुनाव में श्री जगदीप धनखड़ जी को कुल 528 और श्रीमती मार्ग्रेट अल्वा जी को 182 मतदान मिले है और NDA के उम्मीदव श्री जगदीप धनखड़ जी का 346 जैसे भारी मतदान से विजय हुआ है, और चुनाव के रिजल्ट के बाद श्री जगदीप धनखड़ जी भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे।। (Jagdeep Dhankhar will take oath as the Vice President of India 2022)
Jagdeep dhankhar (जगदीप धनखड़)
जगदीप धनखड़ का परिचय (jagdeep dhankhar biodata)
धनखड़ का जन्म 18 मई 1951 को राजस्थान राज्य के झुंझुनू जिले के एक छोटे से गाँव 'किठाना' में जाट के घर हुआ था। उनकी प्राथमिक शिक्षा किठाना गांव के स्कूल में हुई। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सैनिक स्कूल, चित्तौड़गढ़ से पूरी की और फिर राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। स्कूली शिक्षा के बाद जगदीप धनखड़ ने राजस्थान के प्रतिष्ठित महाराज कॉलेज जयपुर में ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए एडमिशन लिया. यहां से उन्होंने फिजिक्स में BSE की डिग्री ली| साल 1978 में उन्होंने जयपुर विश्वविद्यालय में एलएलबी कोर्स में एडमिशन लिया |कानून की डिग्री लेने के लेने के बाद जगदीप धनखड़ ने वकालत शुरू कर दी और साल 1990 में जगदीप धनखड़ को राजस्थान हाईकोर्ट में सीनियर एडवोकेट का ओहदा दिया गया. जगदीप धनखड़ ने सुप्रीम कोर्ट से लेकर देश के कई हाईकोर्टों में वकालत की प्रैक्टिस की. साल 1988 तक देश में प्रतिष्ठित वकीलों में शुमार हो गए |
चुनावी राजनीति
वह 1989-91 के दौरान राजस्थान में झुंझुनू (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से 9वीं लोकसभा में जनता दल का प्रतिनिधित्व करते हुए संसद सदस्य थे। वह 1993-98 के दौरान 10वीं विधान सभा राजस्थान में किशनगढ़, राजस्थान से विधान सभा के पूर्व सदस्य और राजस्थान उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन, जयपुर के पूर्व अध्यक्ष भी रहे। जगदीप धनखड़ का राजनीतिक करियर करीब 30 सालों का है | वह चंद्रशेखर की सरकार में संसदीय कार्य मंत्री की जिम्मेदारी निभा चुके हैं | लोकसभा हो या विधानसभा वह जिस सदन के भी सदस्य रहे उसकी अहम समितियों में शामिल रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने राजस्थान में जाट बिरादरी को आरक्षण दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई है. 20 जुलाई 2019 को उनको पश्चिम बंगाल का गवर्नर नियुक्त किया गया
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति
30 जुलाई 2019 को, राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया।
16 जुलाई 2022 को भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने उन्हें भारत के उपराष्ट्रपति के 2022 के चुनाव के लिए अपना प्रत्याशी घोषित किया।
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